Vernier Calipers Parts & Type | वर्नियर कैलिपर्स क्या है

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Vernier Calipers Parts & Type | वर्नियर कैलिपर्स क्या है

वर्नियर कैलिपर्स के मुख्य भाग

मेन स्केल (Main Scale)

यह एक वेनेडियम स्टील की स्टील रूल के समान चौड़ी परन्तु उससे काफी मोटी पट्टी होती है , जिस पर एक साइड में मि.मी. तथा दूसरी साइड में इंचों के निशान अंकित होते हैं । मि.मी. तथा इंचों के दसवें भागों को भी आगे कई भागों में बाँटा गया होता है , जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है ।

इसके अगले भाग में एक फिक्स्ड जबड़ा तथा आन्तरिक माप के लिए फिक्स्ड निब ( fixed nib ) लगी होती है । मेन स्केल के पीछे की साइड में एक ग्रूव ( groove ) होता है , जिसमें डैप्थ मैजरिंग स्ट्रिप ( depth measuring strip ) स्लाइड ( slide ) करती है । वर्नियर कैलीपर्स के बाकी सभी भाग मेन स्केल के ऊपर ही स्लाइड करने के लिए फिट ( fit ) किए गए होते हैं ।

वर्नियर स्केल (Vernier Scale)

वर्नियर कैलीपर्स का मुख्य भाग होता है । इसको मेन स्केल पर स्लाइड करने के लिए बनाया गया है । इसकी दोनों साइडों में कमानी स्प्रिंग दिया होता है , जो इसको सदा एक ही अवस्था ( position ) में रखता है । इसके बीच में एक खिड़की ( window ) कटी होती है , जिस पर मेन स्केल के निश्चित भागों को एक से अधिक भागों में बाँटा गया होता है । इसको वर्नियर के सिद्धान्त में स्पष्ट किया गया है । वर्नियर स्केल के साथ में मेन स्केल के समान ही चल जबड़ा ( movable jaw ) तथा चल निब ( movable nib ) लगी होती है । इसको किसी स्थान पर स्थिर करने के लिए इसके ऊपरी भाग में एक लॉकिंग स्क्रू लगा होता है । यह स्केल एक फाइन एडजस्टमेन्ट यूनिट से मिला होता है ।

फाइन एडजस्टमेन्ट यूनिट (Fine Adjustment Unit)

वर्नियर स्केल को थोड़ा – सा आगे – पीछे लेने के लिए इस यूनिट का प्रयोग किया जाता है । इस यूनिट के ऊपर लगे लॉकिंग स्क्रू से इसे स्थिर कर दिया जाता है । अब इसके नीचे लगे नट को घुमाने पर उसमें लगे स्क्रू के द्वारा वर्नियर स्केल आगे – पीछे सरकता है । इसका प्रयोग वर्नियर स्केल के फाइन एडजस्टमेन्ट के लिए किया जाता है ।

डैप्थ मेजरिंग स्ट्रिप (Depth Measuring Strip)

वर्नियर स्केल के साथ में एक बारीक स्ट्रिप लगी होती है , जो मेन स्केल में पीछे की ओर बने ग्रूव ( groove ) में स्लाइड करती है । यह ग्रूव से बाहर न आए इसके लिए मेन स्केल के आखिरी सिरे पर ग्रूव के ऊपर एक पत्ती लगी होती है । जव वर्नियर स्केल के जबड़े मिले होते हैं तो मेन स्केल पर शून्य , वर्नियर स्केल के शून्य के सामने होता है ।

ऐसे समय पर डैप्थ स्ट्रिप भी मेन स्केल के आखिरी सिरे से मिल रही होती है । कुछ कैलीपर्स में आन्तरिक माप लेने के लिए अलग से जबड़े नहीं होते बल्कि बाहरी माप लेने वाले जबड़ों को एक निश्चित मोटाई में बाहर से गोल किया होता है । यह मोटाई साधारणत : 10 मिमी होती है । इस माप को कैलीपर्स द्वारा ली गई आन्तरिक माप में जोड़ दिया जाता है ।


बर्नियर कैलीपर्स के प्रकार | Type of Vernier Calipers

आजकल वर्नियर कैलीपर्स को और भी अधिक उपयोगी बनाने के लिए उसकी बनावट में कुछ परिवर्तन किए गए हैं । बाजार में निम्न वर्नियर कैलीपर्स उपलब्ध हैं।

वर्नियर कैलीपर्स टाइप -1

यह सबसे अधिक प्रयोग में आने वाला साधारण वर्नियर कैलीपर्स है । इसमें बोर आदि की माप लेने के लिए क्रॉस बिल टाइप जबड़े लगे होते हैं । अन्य भाग ; जैसे – डैप्थ स्ट्रिप , फाइन एडजस्टिंग यूनिट आदि ; अन्य के समान ही होते हैं । बाहरी माप लेने के लिए नाइफ एज ( knife edge ) सहित दो जबड़े नीचे की ओर रहते हैं ।

वर्नियर कैलीपर्स टाइप- 2

इस कैलीपर्स में क्रॉस बिल टाइप जबड़ों के स्थान पर साधारण जबड़े होते हैं , जिन्हें बाहरी माप लेने के लिए प्रयोग में लाया जाता है । ये छोटे होते हैं तथा इनके किनारे शार्प ( sharp ) होते हैं । दूसरे बड़े जबड़े अन्दर की साइड से जॉब की बाहरी माप लेते हैं तथा इनके कुछ भाग को एक निश्चित मोटाई ( 10 मिमी ) का बनाकर गोलाई में ग्राइण्ड कर दिया जाता है । इस 10 मिमी वाले भाग को जॉब की आन्तरिक माप लेने के लिए प्रयोग करते हैं।


मैग्नीफाइड बर्नियर कैलीपर्स (Magnified Vernier Calipers)

बर्नियर कैलीपर्स के मेन स्केल पर तथा वर्नियर स्केल पर लगे हुए निशान बहुत पास – पास होते हैं । नंगी आँखों से यह जान पाना कठिन हो जाता है कि वर्नियर स्केल का कौन – सा निशान मेन स्केल के किस निशान से ठीक – ठीक मिलता है । वर्नियर स्केल के ऊपर ही एक मैग्नीफाइंग लेन्स फिट कर दिया जाता है जो निशानों को बढ़ा कर दर्शाता है । इससे निशानों को मिला पाना आसान हो जाता है ।


डायल कैलीपर्स (Dial Callipers)

साधारण वर्नियर कैलीपर्स से माप लेने के लिए वर्नियर स्केल को पढ़कर उसे अल्पतम माप से गुणा करके माप निकालनी पड़ती है । इसमें त्रुटि होने की सम्भावना होती है । इसमें वर्नियर स्केल के स्थान पर डायल गेज लगा होता है जो कि 100 भागों में बँटा होता है । इसके केन्द्र पर लगी सुई इसके एक मिमी चलने पर 100 डिवीजन घूम जाती है । यदि यह सुई एक डिवीजन चलती है तो कैलीपर्स 0.01 मिमी की दूरी तय करता है । अतः इस कैलीपर्स की अल्पतम माप 0.01 मिमी होती है । माप लेने से पहले जबड़ों को मिलाते हैं तथा डायल गेज के डायल को घुमाकर सुई को डायल के शून्य से मिला लेते हैं । अब जबड़ों को खोलकर उनमें जॉब को पकड़ते हैं तथा मेन स्केल तथा डायल की रीडिंग लेकर जोड़ लेते हैं । चित्र में एक डायल कैलीपर्स दर्शाया गया है ।


डिजिटल कैलीपर्स (Digital Callipers)

यद्यपि डायल गेज कैलीपर्स से रीडिंग लेना बहुत आसान है , परन्तु डिजिटल कैलीपर्स उससे भी ज्यादा आसानी से रीडिंग देने में सक्षम है । इसमें वर्नियर स्केल के स्थान पर स्क्रीन होती है । जैसे – जैसे हम वर्नियर कैलीपर्स को खोलते हैं स्क्रीन पर कैलीपर्स के बीच की दूरी प्रदर्शित ( display ) होती रहती है । यह दशमलव के दो अंकों तक मिमी में दूरी को दर्शाता है ; जैसे -20.09 मिमी या 13.76 मिमी आदि । एक डिजिटल कैलीपर्स चित्र में दर्शाया गया है ।


वर्नियर गियर टूथ कैलीपर्स (Vernier Gear Tooth Callipers)

किसी भी स्पर गियर ( spur gear ) के दाँतों ( tooth ) की बनावट कितनी सही है , यह जाँच करने के लिए वर्नियर गियर टूथ कैलीपर्स प्रयोग में लाया जाता है । इसके द्वारा प्रमुख रूप से दो माप ली जाती हैं ( i ) गियर का कॉर्डल अडैण्डम ( Chordal Addendum of Gear ) तथा ( ii ) गियर की कॉर्डल थिकनेस ( Chordal Thickness of Gear ) ।

चित्र में एक वर्नियर गियर टूथ कैलीपर्स गियर के दाँते की जाँच करते हुए दर्शाया गया है । सर्वप्रथम कैलीपर्स के ऊपरी स्केल को कॉर्डल अडैण्डम के बराबर सैट कर लिया जाता है जिससे कैलीपर्स के दोनों जबड़े पिच सर्किल को छ सके । इसी पिच सर्किल पर दाँते की मोटाई ( thickness of the teeth ) मापी जाती है ।


सावधानियां

  1. वर्नियर कैलीपर्स एक सूक्ष्ममापी उपकरण है । अत : इसे सावधानी से रखा जाए , नीचे गिरने या अन्य हैण्ड टूल्स की चोट लगने से बचाया जाना चाहिए ।
  2. मापने के समय बहुत अधिक दबाव नहीं डालना चाहिए ।
  3. मापने से पहले शून्य त्रुटि चैक कर लेनी चाहिए ।
  4. फाइन एडजस्टिंग स्क्रू का प्रयोग करते समय अधिक बल नहीं लगाना चाहिए ।
  5. इसके जबड़े जॉब की सतह पर कम – से – कम रगड़ खाने चाहिए , क्योंकि अधिक रगड़ खाने से वे जल्दी घिस सकते हैं ।
  6. घूमते हुए जॉब पर इससे कभी माप नहीं लेनी चाहिए ।

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