Compression Ignition Engine In Hindi | कंप्रेशन इग्निशन इंजन

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कंप्रेशन इग्निशन इंजन | Compression Ignition Engine In Hindi

Compression Ignition Engine कुछ अलग सिद्धान्त (Principle) पर कार्य करते हैं, जिसे कम्प्रेशन इग्नीशन (Compression Ignition) प्रणाली कहा जाता है। इस प्रकार के इंजन में ईंधन के रूप में एक मोटा तेल (पेट्रोलियम पदार्थ) प्रयोग किया जाता है, जिसका नाम आविष्कारक के नाम पर डीजल ऑयल रखा गया है। इस ऑयल से चलने वाले इंजन डीजल इंजन कहलाते हैं। इन इंजनों में न तो काबुरेटर (Carburetter) की सहायता से मिश्रण तैयार करने की आवश्यकता होती है और न ही उसे बैटरी की सहायता से चिंगारी देकर जलाया जाता है।


Compression Ignition Engine में तीन मुख्य बातें होती हैं।

  1. Compression Ignition Engine में ईंधन को जलाने के लिए केवल सिलेण्डर में दबी हवा (Compressed Air) के उच्च तापक्रम का प्रयोग करते हैं।
  2. ईंधन को सीधे Combustion Chamber में ही इन्जेक्ट किया जाता है, जहाँ गर्म हवा रहती है।
  3. सिलेण्डर में जो हवा जाती है, वह प्राय : Throttle आदि से नियन्त्रित नहीं की जाती है। इसलिए उसका दबाव सदा एक जैसा (Constant) रहता है। इन इंजनों में भी लगभग सभी भाग स्पार्क इग्नीशन इंजन की तरह ही होते हैं, केवल Fuel Supply में अन्तर होता है। Compression लगभग एक ही नियम से होता है , परन्तु डीजल इंजन में उच्च दबाव तथा तापमान प्राप्त करने के लिए Compression Ratio 1 : 12 से 1 : 22 तक रहता है।

डीजल इंजन की चार – स्ट्रोक डीजल साइकिल

जिस प्रकार पेट्रोल इंजन की फोर – स्ट्रोक साइकिल में Suction , Compression , Power/Expansion तथा Exhaust Stroke एक क्रम में होते हैं , उसी प्रकार डीजल इंजन में भी चारों स्ट्रोक उसी क्रम में होते हैं।

Suction Stroke | सक्शन स्ट्रोक

इस स्ट्रोक में पिस्टन TDC से BDC की ओर चलता है। उस समय इनलेट वाल्व खुला रहता है। सिलेण्डर में पिस्टन के नीचे जाने से खाली जगह हो जाती है। इससे सिलेण्डर में Suction पैदा होता है, और इनलेट वाल्व तथा इनलेट मैनीफोल्ड द्वारा एयर क्लीनर (Air Cleaner) से साफ हवा खिंचकर सिलेण्डर में भर जाती है।


Compression Stroke | कम्प्रेशन स्ट्रोक

इस स्ट्रोक में पिस्टन BDC से TDC की ओर चलता है। उस समय सक्शन स्ट्रोक में खुला हुआ इनलेट वाल्व भी बन्द हो जाता है। पिस्टन के ऊपर जाने से सिलेण्डर में आई हवा पर दबाव पड़ता है, परन्तु उसे कहीं से भी निकलने का मार्ग नहीं मिल पाता। अन्ततः वह Combustion Chamber में दब (Compress) जाती है।


Power/Expansion Stroke | पॉवर या फायरिंग स्ट्रोक

Combustion Chamber में दबने के बाद हवा का तापक्रम डीजल जलने के तापक्रम से बहुत अधिक हो जाता है। इस गर्म हवा में फ्यूल इन्जेक्शन पम्प की सहायता से इन्जेक्टर (Injector) द्वारा डीजल का Spray कर दिया जाता है। गर्म हवा में डीजल के पहुँचते ही वह जल जाता है, जिससे गैसें फैलती (Expand) हैं । गैसों के फैलने से पिस्टन को धक्का लगता तथा पिस्टन TDC से BDC की ओर चलता है। पिस्टन को मिली यह Power कनेक्टिग रॉड द्वारा Crank Shaft तथा फ्लाई को घुमाती है, जिससे अन्य Mechanical कार्य लिए जाते हैं।


Exhaust Stroke | एग्जॉस्ट स्ट्रोक

पिस्टन के BDC पर पहुँचने से कुछ पहले ही एग्जॉस्ट वाल्व खुल जाता है तथा पिस्टन पुन : BDC से TDC की ओर चलता है। इससे सिलेण्डर में भरी हुई जली निष्क्रिय गैसों पर दबाव पड़ता है और जली गैसें एग्जॉस्ट वाल्व, एग्जॉस्ट मैनीफोल्ड तथा साइलेन्सर पाइप द्वारा सिलेण्डर से बाहर निकल जाती हैं। इसी प्रकार क्रम से चारों स्ट्रोक होते रहते हैं तथा इंजन चलता रहता है।

इन्हे भी पढ़े – Spark Ignition Engine In Hindi | स्पार्क इग्निशन इंजन


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