Spark Ignition Engine In Hindi | स्पार्क इग्निशन इंजन

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स्पार्क इग्निशन इंजन | Spark Ignition Engine In Hindi

Spark Ignition Engine

Spark Ignition Engine में इंजन चक्र (Cycle) पूरा करने के लिए सक्शन स्ट्रोक, कम्प्रैशन स्ट्रोक, पॉवर या फायरिंग स्ट्रोक तथा एग्जॉस्ट स्ट्रोक पूरे करने होते हैं। इन स्ट्रोकों द्वारा एक इंजन साइकिल में घटित होने वाली घटनाओं (Events) को क्रम से नीचे समझाया गया है।

Suction Stroke | सक्शन स्ट्रोक

ऑटो प्रिन्सिपल ऑफ फोर – स्ट्रोक साइकिल का यह प्रथम स्ट्रोक होता है। इस स्ट्रोक में Inlet valve खुला रहता है, जिसके द्वारा पेट्रोल एवं हवा का मिश्रण सिलेण्डर में जाता है। पिस्टन ऊपर TDC से नीचे BDC की ओर चलता है। सिलेण्डर में पिस्टन के नीचे की ओर पहुँच जाने से वहाँ खाली जगह (Vacuum) हो जाती है। इस खाली जगह को पूरा करने के लिए Carburetter द्वारा पेट्रोल एवं हवा का मिश्रण Inlet Manifold तथा Inlet valve के रास्ते Suction के कारण सिलेण्डर में भर जाता है।


Compression Stroke | कम्प्रेशन स्ट्रोक

Spark Ignition Engine का दूसरा स्ट्रोक होता है। इस स्ट्रोक में पिस्टन नीचे BDC से ऊपर TDC की ओर चलता है। इस समय सक्शन स्ट्रोक में खुला हुआ Inlet Valve बन्द हो जाता है। पिस्टन के ऊपर चलने से सिलेण्डर में भरे पेट्रोल एवं हवा के मिश्रण पर दबाव पड़ता है, परन्तु उसे पिस्टन के ऊपर से निकलने का कहीं भी मार्ग नहीं मिलता है। इस कारण वह Cylinder Head में बने कम्बश्चन चैम्बर में Compressed जाता है।


Power/Expansion Stroke | पॉवर या फायरिंग स्ट्रोक

Spark Ignition Engine में पिस्टन का तीसरा स्ट्रोक होता है। इस स्ट्रोक में ही Compressed मिश्रण को जलाया जाता है। जब पिस्टन लगभग TDC के पास पहुँचने को होता है तो दबे ( Compressed ) हुए मिश्रण को स्पार्क प्लग (Spark Plug) द्वारा Battery आदि के करण्ट की सहायता से चिंगारी (Spark) देकर जला दिया जाता है। इससे सिलेण्डर के अन्दर एक विस्फोट जैसा होता है, तथा मिश्रण का पेट्रोल जल जाता है और गैसें (हवा) बहुत ताकत से फैलती हैं। इसी से शक्ति प्राप्त होती है।

गैसों के फैलने की यह शक्ति पिस्टन हैड को धक्का मारती है तथा पिस्टन ऊपर TDC से नीचे BDC की ओर चलता है। पिस्टन के साथ ही लगी कनेक्टिग रॉड (Connecting Rod) पिस्टन को मिले इस धक्के के कारण नीचे आकर Crank Shaft तथा फ्लाई व्हील को घूमने की शक्ति प्रदान करती है। फ्लाई व्हील द्वारा इंजन की शक्ति का उपयोग अन्य (Mechanical) कार्यों के लिए किया जाता है।


Exhaust Stroke | एग्जॉस्ट स्ट्रोक

Spark Ignition Engine का चौथा (Fourth) तथा अन्तिम स्ट्रोक पिस्टन द्वारा इंजन की एक साइकिल में पूरा होता है। इस स्ट्रोक में जली हुई गैसों को सिलेण्डर से बाहर निकाला जाता है, जिससे कि ताजा (Fresh) मिश्रण पुनः सिलेण्डर में प्रवेश कर सके। जिस समय गैसों का धक्का खाकर पॉवर स्ट्रोक में पिस्टन नीचे BDC की ओर आने लगता है, उस समय एग्जॉस्ट वाल्व (Exhaust Valve) जिसके द्वारा जली गैसें सिलेण्डर से बाहर निकलती हैं , खुल जाता है।

पिस्टन पुन : नीचे (BDC) से ऊपर (TDC) की ओर चलता है। पिस्टन के ऊपर चलने से सिलेण्डर की जली निष्क्रिय गैसों का दबाव पड़ता है। इस कारण वे गैसें एग्जॉस्ट वाल्व , एग्जॉस्ट मैनीफोल्ड तथा साइलेन्सर (Silencer) में होकर सिलेण्डर से बाहर निकल जाती हैं। जब पिस्टन ऊपर TDC पर पहुँच जाता है तो खुला हुआ एग्जॉस्ट वाल्व बन्द हो जाता है। इसी प्रकार सिलेण्डर में पिस्टन के चलने से चारों स्ट्रोक ( सक्शन , कम्प्रेशन , पॉवर तथा एग्जॉस्ट ) क्रम (Sequence) से पूरे होते रहते हैं तथा इंजन चलता रहता है।

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