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Limits in hindi, Limit Meaning – लिमिट्स क्या है?

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Limits in hindi | Type of Limit | लिमिट्स क्या है?

जब भी कोई पार्ट मशीन शॉप में बनने के लिए दिया जाता है, तो उसकी Changeability को ध्यान में रखते हुए उसके मूल साइज में कुछ छूट दी जाती है। यह छूट अधिकतम रहती है, परन्तु यह ध्यान रखा जाता है, कि पार्ट्स की फिटिंग पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े। आइए जानते है, Limits in hindi और Type of Limit के बारे मे बिस्तर से जानकारी –

इसलिए पार्ट को उसके मूल साइज से एक Limit में ही कम या अधिक बनाया जा सकता है। यह छूट जितनी अधिक होगी, पार्ट्स को बनाने में उतना ही कम समय लगेगा तथा Rejection भी उतना ही कम होगा।

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Limit Meaning In hindi

किसी मूल साइज में दी गई वह अधिकतम छूट जिस पर पार्ट्स बनाए जा सकते हैं, उस साइज के लिमिट्स कहलाते हैं, यह लिमिट दो प्रकार के होते हैं।

Type of Limit – Limit के प्रकार

  1. Upper Limit | अपर लिमिट
  2. Lower Limit | लोअर लिमिट

Upper Limit in hindi | अपर लिमिट

जॉब के अधिकतम साइज को प्रकट करने के लिए उसके मूल साइज में स्वीकृत छूट को उसकी अपर लिमिट ( upper limit ) कहते हैं जैसे

यदि बेसिक साइज 60 मिमी, छुट = +- 0.02 मि. मी.

तो उसकी अपर लिमिट +0.02 मि. मी.

तथा अपर लिमिट साइज = 60.02 मि. मी. होगा।


Lower Limit in hindi | लोअर लिमिट

जॉब के न्यूनतम साइज को प्रकट करने के लिए उसके मूल साइज में स्वीकृत छूट को उसकी लोअर लिमिट (lower limit) कहते हैं, जैसे

जॉब की लोअर लिमिट = – 0.02 मि. मी.

लोअर लिमिट साइज = 60.00 – 0.02 = 59.98 मि.मी. होगा।


Basic Size | बेसिक साइज क्या है ?

यहाँ पर मूल साइज ( Basic size ) से हमारा तात्पर्य उस साइज से है, जिस पर छूट देकर उस साइज का सीमांकन Limitation किया गया है।

जैसे 60 +- 0.02 मिमी की विमा में मूल साइज (Basic size) 60 मिमी है।

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Actual Size | वास्तविक साइज – Limits in hindi

इससे हमारा तात्पर्य Job के उस साइज से है, जो मशीनिंग होने के पश्चात् उसको मापने पर वास्तव में प्राप्त होता है। यदि वास्तविक साइज लोअर लिमिट साइज से अधिक तथा अपर लिमिट साइज से कम होता है,

तब जॉब को OK कर दिया जाता है, परन्तु यदि वास्तविक साइज, लोअर लिमिट से कम या अपर लिमिट से अधिक होता है, तो जॉब को Reject कर दिया जाता है।

जॉब की लिमिट्स तथा फिट्स को निर्धारित करने के लिए कई सिस्टम है। जैसे :-

  • इण्टरनेशनल स्टैण्डर्ड ऑर्गेनाइजेशन ( ISO )
  • ब्रिटिश स्टैण्डर्ड सिस्टम ( BSS )
  • ब्यूरो ऑफ इण्डियन स्टैण्डर्ड ( BIS )
  • न्यूऑल सिस्टम ( Newall System )

हमारे देश में ब्यूरो ऑफ इण्डियन स्टैण्डई (BIS) द्वारा निर्धारित नियमों पर कार्य किया जाता है। इसके अन्तर्गत आपस में फिट होने वाले पास में अन्दरूनी साइज (जिसमें कोई दूसरा पार्ट फिट होता है) वाला भाग होल (hole) कहलाता है, तथा बाहरी साइज वाला भाग शाफ्ट (shaft) कहलाता है।


इन्हे भी पढे :- Limits in hindi


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