“इस कंपनी के प्रोडक्ट्स पर आँख बंद करके भरोसा किया जा सकता है, क्योंकि यह एक ISO Certified कंपनी है!” — आपने यह लाइन बहुत बार सुनी होगी, है ना?
आजकल हर छोटी-बड़ी कंपनी अपने लेटरहेड या वेबसाइट पर बड़े अक्षरों में “100% ISO Certified Company” लिखती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह ISO Certification असल में क्या होता है, इसका फुल फॉर्म क्या है और कोई कंपनी इसे कैसे हासिल कर सकती है? अगर आप किसी Quality Control डिपार्टमेंट में काम करते हैं या जॉब इंटरव्यू देने जा रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए रामबाण है।

ISO Certification (आईएसओ प्रमाणन) क्या है?
ISO Certification एक प्रकार का प्रमाण-पत्र (Certificate) होता है, जो कि किसी व्यवसाय, संस्था या उद्योग को दिया जाता है। यह सर्टिफिकेट इस बात की गारंटी या सबूत होता है कि वह कंपनी अपने प्रोडक्ट्स या सर्विस को बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय Quality Standard (गुणवत्ता मानक) का सख्ती से पालन कर रही है। आसान शब्दों में कहें तो, यह इस बात का सबूत है कि कंपनी बेहतरीन और सुरक्षित क्वालिटी वाले प्रोडक्ट बनाती है।
ISO का इतिहास:
ISO एक अंतरराष्ट्रीय संगठन (International Organization) है, जिसकी स्थापना 23 फरवरी 1949 को जिनेवा (स्वित्ज़रलैंड) में हुई थी। आज इसमें 150 से ज्यादा देश शामिल हैं। अगर कोई कंपनी Total Quality Management (TQM) को सही से लागू करती है, तो उसे ISO सर्टिफिकेट बड़ी आसानी से मिल जाता है।
ISO Full Form | ISO का फुल फॉर्म क्या है?
ISO का पूरा नाम International Organization for Standardization (अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन) है।
ISO Certification कैसे मिलता है? (क्या काम है)
कोई भी कंपनी बस पैसे देकर ISO नहीं ख़रीद सकती। ISO की टीम कंपनी में जाकर बारीकी से ऑडिट (Audit / जांच) करती है:
- प्रोडक्ट की गुणवत्ता (Quality) कैसी है? क्या सिर्फ अच्छी बातें कागज़ पर हैं या ज़मीन पर भी काम हो रहा है?
- क्या ग्राहक (Customer) इस कंपनी के प्रोडक्ट से खुश हैं? (Customer Satisfaction)। कस्टमर की शिकायत को सुलझाने का कंपनी का तरीका क्या है?
- कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सभी Safety Rules फॉलो किए जा रहे हैं या नहीं?
- क्या कंपनी का मैनेजमेंट सिस्टम मज़बूत है और नियम-कानून से चलता है?
Benefits of ISO | ISO सर्टिफिकेट के फायदे
- कस्टमर का भरोसा (Trust): ISO का ठप्पा लगने से बाज़ार और ग्राहकों में कंपनी प्रति गहरा विश्वास पैदा हो जाता है।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापर (Global Trade): जब कंपनी के पास ISO होता है, तो वह अपने प्रोडक्ट्स दुनिया के किसी भी देश (Export) में आसानी से बेच सकती है।
- कर्मचारियों की ख़ुशी: अक्सर देखा गया है कि जब कंपनी 5S Methodology और Kaizen जैसी बेहतरीन तकनीकें अपनाकर ISO लेती है, तो कर्मचारियों (Workers) में भी काम करने का भारी उत्साह रहता है।
- मुनाफा: इसके लागू होने से कंपनी में गलतियां / रिजेक्ट पार्ट्स (Scrap) कम बनते हैं, जिससे पैसे व समय दोनों की भारी बचत होती है।
Type of ISO Certification in Hindi (ISO के प्रकार)
दुनिया में अलग-अलग उद्योगों के लिए अलग-अलग ISO सर्टिफिकेट बनाए गए हैं। कुछ सबसे मशहूर नीचे दिए गए हैं:
- ISO 9001:2015 – Quality Management System (यह सबसे ज्यादा मशहूर और इस्तेमाल होने वाला ISO है)।
- ISO 14001:2015 – Environment Management System (यह पर्यावरण को बचाने पर फोकस करता है)।
- OHSAS 18001 / ISO 45001 – Occupational Health & Safety Management System (मज़दूरों की सुरक्षा के लिए)।
- ISO 27001 – Information Security Management System (IT कंपनियों के लिए डेटा सुरक्षा)।
- ISO 22000 – Food Safety Management (खाने-पीने की चीज़ें बनाने वाली कंपनियों के लिए)।
What is ISO 9000 & ISO 9001:2015?
ISO 9000 असल में ‘Quality Management Systems’ का ही एक मुख्य हिस्सा है जिसे 1987 में जारी किया गया था। जब कोई कंपनी PPAP और APQP जैसे धांसू टूल्स का सही से इस्तेमाल करती है, तो उसे ISO 9000 के मापदंडों को पूरा करने में बहुत आसानी होती है।
इसी का जो सबसे एडवांस और अपडेटेड वर्ज़न आज पूरी दुनिया (180 देशों में) चल रहा है, वह है ISO 9001:2015। पहले लोग ISO 9001:2008 इस्तेमाल करते थे लेकिन अब उसे अपग्रेड करके 2015 कर दिया गया है।
ISO Certification के लिए एप्लीकेशन फीस (Fees)
कोई एक फिक्स (Fixed) रेट नहीं है जो हर कंपनी पर लागू हो। ISO एजेंसी आपकी कंपनी का साइज़ देखकर फीस तय करती है, जैसे कि:
- कंपनी या आर्गेनाईजेशन कितनी बड़ी है?
- वहां कितने एम्प्लॉइज (Employees) काम करते हैं?
- आपकी Manufacturing Process कितनी जटिल (Complex) है?
- कंपनी में काम करने का रिस्क (Risk/Hazard) लेवल क्या है?
- वहां दिन और रात की कितनी वर्किंग शिफ्ट (Shifts) चलती हैं?
इन आर्टिकल्स को पढ़ना ना भूलें:
- क्वालिटी कंट्रोल (QC) क्या है, क्यों करते है?
- क्वालिटी एश्योरेंस (QA) और QC में क्या अंतर है?
- इंटरव्यू में पूछे जाने वाले 7QC Tools कौन से हैं?
- Total Quality Management (TQM) क्या है?
ISO Certification से संबंधित कुछ सवाल – FAQ’s
ISO का फुल फॉर्म ‘International Organization for Standardization’ है। यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो दुनिया भर की कंपनियों और उद्योगों के लिए क्वालिटी और सेफ्टी के नियम (Standard) बनाता है।
ISO 9001:2015 दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम (QMS) सर्टिफिकेट है। यह दर्शाता है कि कोई कंपनी अपने ग्राहकों को बेहतर क्वालिटी के प्रोडक्ट और सर्विस देने के लिए पूरी तरह से सक्षम और सर्टिफाइड है।
हाँ, बिल्कुल! ISO Certification किसी भी साइज़ की कंपनी या संस्था के लिए खुला होता है। छोटी कंपनियों की ऑडिट फीस भी उनके कम वर्कर्स और छोटे साइज के कारण कम ही होती है।
Sir IATF ke bare me btaiega
16949
Sir IATF 16949 ke jo sir 10 clauses
Or 7 principle ke bare me btaiega
Mai aap ka ye aap par day study karta ho
Thanks 👍😊 sir
SIR PLEASE UPDATE ABOUT IATF. WHAT IS DIFFERENCE B/W ISO AND IATF
सर ISO प्रमाणपत्र साठी किती फी लागते