Fishbone Diagram क्या है? (What is Fishbone Diagram in Hindi)
मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री हो या फिर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी, कभी न कभी कोई बड़ी समस्या आ ही जाती है। ऐसे समय में जब हमें यह पता नहीं होता कि समस्या कहाँ से शुरू हुई, तब सबसे ज़्यादा Fishbone Diagram. काम आता है.
इसे Ishikawa Diagram या Cause and Effect Diagram भी कहा जाता है। यह 7 QC Tools (क्वालिटी कंट्रोल टूल्स) का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। चूँकि इस डायग्राम का आकार बिल्कुल एक “मछली के कंकाल (Fishbone)” की तरह दिखाई देता है, इसलिए इसका नाम Fishbone Diagram पड़ा।

आसान शब्दों में कहें तो, Fishbone Diagram किसी भी प्रॉब्लम (Effect) के पीछे क्या कारण (Causes) हो सकते हैं, उन्हें ढूँढने का एक विज़ुअल (Visual) तरीका है।
इसका आविष्कार किसने किया?
इसे 1968 में जापान के क्वालिटी कंट्रोल एक्सपर्ट Kaoru Ishikawa (काओरू इशिकावा) ने तैयार किया था। इसीलिए इसे उनके सम्मान में Ishikawa Diagram भी कहा जाता है। इसका डिज़ाइन बहुत ही साधारण लेकिन असरदार होता है, जिसे पूरी टीम साथ बैठकर व्हाइटबोर्ड पर डिज़ाइन करती है।

Fishbone Diagram के 6Ms (The 6M Methodology)
जब भी कोई समस्या आती है, तो पूरी टीम बैठकर Brainstorming (विचार-विमर्श) करती है। इस दौरान टीम मुख्य रूप से 6M केटेगरी (6Ms) पर ध्यान देती है कि आखिर गलती कहाँ से हुई। मछली की हर एक हड्डी एक ‘M’ को दर्शाती है:
- Man (मशीन चलाने वाला इंसान): क्या काम करने वाले ऑपरेटर या कर्मचारी से कोई गलती हुई? क्या उसे पूरी ट्रेनिंग मिली थी? क्या वह थका हुआ था?
- Machine (मशीन व उपकरण): क्या उपकरण में खराबी थी? क्या TPM (Total Productive Maintenance) सही समय पर हो रहा है? क्या कोई टूल टूट गया है?
- Material (कच्चा माल): क्या जो कच्चा माल (Raw Material) सप्लायर से आया था, उसमें कोई डिफेक्ट था? क्या क्वालिटी सही नहीं थी?
- Method (काम करने का तरीका): क्या काम करने का प्रोसेस (SOP – Standard Operating Procedure) ही गलत है? क्या Control Plan में कोई कमी रह गई?
- Measurement (नापने का तरीका): क्या जिस गेज या टूल से मापा गया, उसकी कैलिब्रेशन (Calibration) फेल थी? क्या चेक-शीट में रीडिंग गलत ली गई?
- Mother Nature / Environment (पर्यावरण व आस-पास का माहौल): क्या उस समय फैक्ट्री का तापमान (Temperature), नमी (Humidity) या धुल का असर प्रोडक्ट पर पड़ा?
Real-Life Example of Fishbone Diagram in Hindi
चलिए इसे एक बहुत ही आसान उदाहरण से समझते हैं-
समस्या (Effect): “कार बनाते वक़्त अचानक पार्ट के अंदर बड़ा स्क्रैच (Scratch) आ गया।”
इसे मछली के बिल्कुल सिर (Head) वाले हिस्से पर लिखा जाएगा।
अब हमारी QC और QA टीम Brainstorming करेगी और पता लगाएगी (Causes):
- Man (मैन): नया ऑपरेटर आया था जिसे सही पकड़ने का तरीका नहीं पता था।
- Machine (मशीन): मशीन का फिक्सचर ठीक से टाइट नहीं था।
- Material (कच्चा माल): कच्चे माल में पहले से ही मामूली खरोंच थी।
- Method (मेथड): पार्ट को रखने का तरीका बहुत जल्दबाजी वाला था।
इन सब पॉइंट्स को फिशबोन के अलग-अलग ‘कंकाल’ (Bones) पर लिखा जायेगा ताकि हमें समस्या की जड़ यानी Root Cause (RCA) पता चल सके। अंत में हम 5 Why Analysis का इस्तेमाल करके सबसे मुख्य कारण को हमेशा के लिए ख़त्म कर देते हैं।
फिशबोन डायग्राम के मुख्य फायदे (Benefits)
- यह टीम वर्क (Team Work) को बहुत मजबूत बनाता है क्योंकि इसमें सब मिलकर ब्रेनस्टॉर्मिंग करते हैं।
- यह किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए एक बहुत ही विज़ुअल और साफ तरीका (Clear Picture) देता है।
- यह हमें मुख्य कारण (Root Cause) खोजने में बहुत तेजी लाता है।
- इससे Kaizen (Continuous Improvement) कल्चर को बढ़ावा मिलता है।
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Fishbone Diagram FAQ’s
इसे मुख्य रूप से Ishikawa Diagram और Cause and Effect Diagram के नाम से भी जाना जाता है।
इसका आविष्कार 1968 में जापान के एक महान क्वालिटी कंट्रोल एक्सपर्ट डॉ. काओरू इशिकावा (Dr. Kaoru Ishikawa) ने किया था।
हाँ, यह मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले प्रशिद्ध 7 क्वालिटी कंट्रोल टूल्स (7 QC Tools) का एक बहुत ही महत्वपूर्ण टूल है।
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